Tuesday, November 21, 2017
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आज, आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ में पाँच दिवसीय 5वें साईन्स एक्स्पो के चौथे दिन ''जल संरक्षण एवं प्रबन्धन विषय पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान और वार्ता सत्र का आयोजन किया गया जिसमें डा0 पी0एन0शाह, निदेशक, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर, डा0 वी0पी0शर्मा, उप निदेशक, सीएसआईआर- आईआईटीआर, डा0 अजय शाह, वैज्ञानिक, आईआईएसआर एवं डा0 सुधीर रायज़ादा, वैज्ञानिक, एनबीएफजीआर ने विधार्थियों, शिक्षकों तथा आम जनता से वार्ता की तथा विधार्थियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दिये।


पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार जो 5वें साईन्स एक्सपों का प्रमुख प्रायोजक है, ने अपनी प्रदर्शनी में पृथ्वी तंत्र विज्ञान संस्थान के बारे में जानकारियाँ प्रदर्शित की जिसका उददेश्य सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के लिए मौसम, जलवायु और आपदा के पूर्वानुमान के कौशल को विकसित करना है।

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इस अवसर पर रिमोट सेंसिंग प्रौधोगिकी विषय पर बोलते हुए डा0 पी0एन0शाह ने कहा कि रिमोट सेंसिंग का अर्थ किसी स्थान व वस्तु के सम्पर्क में आये विना उसके बारे में जानकारी प्राप्त करना है और यह प्रकाश के सिद्धांत पर कार्य करता है। उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग से बदलते हुए भू-परिदृश्यों, वृहद और दुर्गम स्थानों आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

''जल और पर्यावरण: चुनौती और नवीनता विषय पर व्याख्यान देते हुए डा0 वी0पी0शर्मा ने बताया कि किस तरह से प्लासिटक, पानी और खाध सामगि्रयों को नुकसान पहुँचाती है। उन्होंने बताया कि सभी तरह के प्लासिटक पानी और खाध सामगि्रयों की पैकिंग के लिए सुरक्षित नहीं होती है और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि प्लासिटक के रसायन खाने और पानी के कणों से प्रतिक्रिया न करें। उन्होंने कहा कि पारम्परिक प्लासिटक के स्थान पर बायो प्लासिटक का उपयोग करना चाहिए जो पर्यावरण कों नुकसान नहीं पहुँचाती है।

डा0 अजय शाह ने गन्ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान का मुख्य उददेश्य कम लागत में गन्ने के उत्पादन को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई करते समय जल के दुरूपयोग को रोकने का प्रयास करना चाहिए। डा0 सुधीर रायज़ादा ने बताया कि जल के अत्यधिक प्रदूषण ने मछली उत्पादन को भी प्रभावित किया है। उन्होंने मत्स्य पालन से सम्बनिधत विभिन्न रोज़गार सम्भावनाओं की भी चर्चा की।

इसके अतिरिक्त आज के कार्यक्रम में विधार्थियों के ज्ञानार्जन हेतु विज्ञान प्रश्नोत्तरी और प्रदर्शन तथा डा0 श्रीनिवास रामानुजन पर फिल्म प्रदर्शन दिखाया गया। इसके साथ विज्ञान प्रसार द्वारा ''ऊर्जा संरक्षण विषय पर प्रश्नोत्तरी हुई तथा ''जल: हमारा जीवन विषय पर भी प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न स्कूलों के लगभग 400 विधार्थियों ने भाग लिया।

आंचलिक विज्ञान नगरी के परियोजना समायोजक श्री उमेश कुमार ने बताया कि एक्स्पो के अंतिम दिन दिनांक 3.2.2013 को प्रात: 10:30 बजे ''फेस टू फेस कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा जिसमें प्रमुख वैज्ञानिक विधार्थियों, अध्यापाकों तथा अभिभावकों से वार्ता करेंगे। इसके अतिरिक्त ''दैनिक जीवन में विज्ञान विषय पर परिवारों के लिए विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता दिन का मुख्य आकर्षण रहेगी। 

5वें साईन्स एक्सपो का समापन समारोह दिनांक 3 फरवरी, 2013 को आयोजित होगा जिसमें डा0 सी0एस0नौटियाल, निदेशक, सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं सीमैप, प्रो0 कृष्णा मिश्रा, जनरल सेक्रेटरी (हेड क्वार्टर), नासी, इलाहाबाद एवं डा0 एम.के.जे.सिद्धिकी, निदेशक एवं सचिव, विज्ञान एवं प्रौेधोगिकी परिषद, उ0प्र0 उपसिथत रहेगें।

आज के कार्यक्रमों में विभिन्न संस्थानों, विधालयों एवं कालेजों के लगभग 550 विधार्थी, अध्यापक तथा वैज्ञानिक उपसिथत थे।

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