Tuesday, November 21, 2017
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इंडियन मीनोपाज सोसाइटी द्वारा ''मीनोपाज एण्ड मेन्टल हेल्थ विषय पर व्याख्यान आयोजित

इलाहाबाद: सिविल लाइन्स सिथत होटल रीजेन्सी के सभागार में इंडियन मीनोपाज सोसाइटी इलाहाबाद चैप्टर द्वारा आयोजित सी0एम0ई0 में इलाहाबाद के विख्यात साइकेटि्रस्ट डा. अभिनव टण्डन ने रजोनिवृतित के समय होने वाले मानसिक बदलावों के ऊपर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। डा. टण्डन ने अपने व्याख्यान में महिला स्वास्थ्य को आवश्यक बताते हुए रजोनिवृतित के समय होने वाले मानसिक बदलावों की विस्तार से चर्चा की। डा. टण्डन ने बताया कि रजोनिवृतित के समय होने वाले शारीरिक बदलावों का गहरा असर मानसिक रूप से भी पड़ता है जिसके कारण मूड सिवंग तथा एन्जाइटीतनाव आदि समस्याएं इस उम्र की महिलाओं में उत्पन्न होने लगती हैं। इस उम्र में होने वाले मानसिक परिवर्तनों के कारण महिलाओं में डिप्रेशन होने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं जिनका समय रहते निदान व काउन्सलिंग तथा कुछ दवाइयों से समाधान सम्भव है।

उन्होने कहा कि इन मानसिक परिवर्तनों को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि कभी-कभी ऐसे लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। अनुसंधानों में यह बात सामने आयी है कि रजोनिवृतित के समय होने वाली नींद में अनियमितता, गर्मी लगना, रात में पसीना अधिक आना, थकावट, चिड़चिड़ापन मूड में बदलाव ला सकता है तथा इस कारण से समस्याएं सामने आ सकती हैं। रजोनिवृतितके पूर्व तथा रजोनिवृतित काल में इस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर में परिवर्तन होता है जिस कारण से मूड में बदलाव आ जाता है। लेकिन यह बदलाव अन्य कारणों से भी हो सकता है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह आवष्यक है।

उन्होंने रजोनिवृतित काल में आने वाले मानसिक परिवर्तनों से बचने तथा उनका सामना करने के लिए सुझाव देते हुए बताया कि अगर आप का मूड आपकी दैनिक जीवन को बाधित कर रहा है तो पर्याप्त मात्रा में नींद लें, सोने-जागने का समय निशिचत करें, सोने के कमरे को ठण्डा तथा अंधेरा रखें, बिस्तर पर सिर्फ सोने के पहले भारी आहार आदि से बचें। प्रतिदिन 30 मिनट तक व्यायाम अवश्य करें। स्ट्रेसतनाव से मुक्त रहने के लिए पाजिटिव थिंकिंग बनायें। रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं, किताबें पढ़े, बाहर अन्य गतिविधियों में व्यस्त हों, आदि ऐसे उपाय हैं जिससे आप रजोनिवृतित के दौरान मानसिक रूप से स्वस्थ तथा एकिटव रह सकती हैं।


डा. वन्दना बन्सल ने सोसाइटी द्वारा आयोजित ''मीनोपाज एण्ड मेन्टल हेल्थ विषय पर आयोजित परिचर्चा में अतिथियों तथा सभा में उपसिथत सदस्यों तथा अन्य लोगों का स्वागत करते हुए का कि रजोनिवृतित काल में अपने शरीर तथा मनोमसितष्क में हो रहे बदलावों को अपने चिकित्सक से विचार-विमर्श करें जिससे इसका निदान हो सके तथा तत्सम्बन्धी समस्या का निराकरण हो सके।

वरिष्ठ लैप्रोस्कोपिक सर्जन एवं पुरूष बाँझपन विशेषज्ञ डा. ए. के. बंसल ने रजोनिवृतित काल में तथा रजोनिवृतित के पश्चात जीवनशैली में परिवर्तनों पर बल दिया तथा कहा कि रजोनिवृतित काल में होने वाली अधिकतर समस्याओं का समाधान उचित तथा सक्रिय जीवनशैली अपनाकर किया जा सकता है।

डा. रागिनी मेहरोत्रा महिलाओं में रजोनिवृतित के समय विभिन्न शारीरिक तथा मानसिक बदलाव आते हैं, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं में रजोनिवृतितकाल में किसी-न-किसी समय अथवा स्तर पर निराशा तथा हताशा के लक्षण अथवा डिप्रेशन के लक्षण उत्पन्न होते हैं। रजोनिवृतित काल में मूड में बदलाव के ऊपर हुए अनुसंधानों में यह बात सामने आयी है कि पेरीमीनोपाज काल में डिप्रेशन व तनाव के खतरे अधिक होते हैं।

डा. रागिनी मेहरोत्रा तथा डा. ए. के. बंसल ने वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता की। डा. अन्जुला सहाय ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा डा. शानित चौधरी ने गोष्ठी का संचालन किया। संगोष्ठी में इंडियन मीनोपाज सोसाइटी इलाहाबाद चैप्टर के सदस्य डा. आई. परिहार, डा. ऊषा सिंह, डा. पुष्पा शुक्ला, डा. अरूणा गौर, डा. मधुरिमा श्रीवास्तव, डा. अमिता यादव, डा. नेहा त्रिपाठी, डा. अल्का श्रीवास्तव, डा. इंदू कनोजिया सहित अन्य चिकित्सकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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