Saturday, November 25, 2017
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santan

सायंकाल का समय था। सभी पक्षी अपने-अपने घोसलों में जा रहे थे। तभी गांव की चार औरते कुएं पर पानी भरने आई और अपना-अपना मटका भरकर बतियाने बैठ गई। इस पर पहली औरत बोली, "भगवान मेरे जैसा लड़का सबको दे। उसका कंठ इतना सुरीला है कि सब उसकी आवाज सुनकर मुग्ध हो जाते हैं।" इस पर दूसरी औरत बोली," कि मेरा लड़का इतना बलवान है कि सब उसे आज के युग का भीम कहते हैं।" इस पर तीसरी औरत कहां चुप रहती वह बोली," मेरा लड़का एक बार जो पढ़ लेता है।

वह उसको उसी समय कंठस्थ हो जाता है।" उन तीनों औरतों का वार्तालाप सुनकर चौथी औरत कुछ नहीं बोली तो इतने में दूसरी औरत ने कहाँ,"बहन! आपका भी तो एक लड़का है ना आप उसके बारे में कुछ नहीं बोलना चाहती।" इस पर उसने कहा," मैं क्या कहूं वह ना तो बलवान है और ना ही अच्छा गाता है।" यह सुनकर चारों स्त्रियों ने मटके उठाए और अपने गांव की ओर चल दी। तभी कानों में कुछ सुरीला सा स्वर सुनाई दिया। पहली स्त्री ने कहा," मेरा पुत्र आ रहा है।" वह कितना सुरीला गाना गा रहा है। लड़के ने अपनी माँ को नहीं देखा और उनके सामने से निकल गया। थोड़ी आगे जाने पर एक बलवान लड़का वहाँ से गुजरा। उस पर दूसरी औरत ने कहा," मेरा बलिष्ट पुत्र आ रहा है। उसने भी अपनी माँ को नहीं देखा और सामने से निकल गया।" थोड़ा दूर जाकर मंत्रो की ध्वनि उनके कानों में पड़ी तभी तीसरी औरत ने कहा," मेरा बुद्धिमान पुत्र आ रहा है।" वह भी श्लोक बोलते हुए पहले वाली दोनों औरतों के पुत्रों की भांति वहां से निकल गया। तभी वहाँ से एक और लड़का निकला वह उस चौथी स्त्री का पुत्र था। वह अपनी माता के पास आया और माता के सर पर से पानी का घड़ा ले लिया और गांव की तरफ चल पड़ा। यह देख तीनों स्त्रीयां चकित रह गई। मानों उनको सांप सुंघ गया हो। वे तीनों आश्चर्य से उसको देखने लगी। तभी उनके पीछे आ रही एक वृद्ध महिला जो काफी समय से उनका वार्तालाप सुन रही थी बोली,"इसे कहते हैं सच्चा हीरा, सबसे पहला और सबसे बड़ा ज्ञान संस्कारों का होता है। जो किसी और से नहीं बल्कि स्वयं हमारे माता-पिता से प्राप्त होता है। फिर भले ही हमारे माता-पिता शिक्षित हो या ना हो यह ज्ञान उनके अलावा दुनिया का कोई भी व्यक्ति नहीं दे सकता है।"

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