Saturday, November 25, 2017
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police station

आज महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है। इलाहाबाद की महिलाएं भी विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रही हैं। एक जमाना था जब इलाहाबाद में महिलाएं रात दस बजे भी आराम से घूमती थीं,अब दिन के दस बजे भी सुरक्षित नहीं है। रात की बात तो छोड़ें प्राय: दिन में लड़कियों के साथ छेड़खानी, लूट-छिनैती,बलात्कार की घटनाओं से शहर शर्मसार होता है। यह किसी एक शहर की समस्या नहीं है बलिक पूरे देश की समस्या है। परंतु आज हम इलाहाबाद की ही चर्चा करेंगे। 

 आज महिलाओं को अपनी सुरक्षा स्वंय करनी पड़ेगी लेकिन वह तो एफ.आई.आर. लिखवाने से ही कतराती हैं और अपराधी इसी बात का फायदा उठाते हैं। उन्हे पता है कि ज्यादातर केसों में लड़कियों को बदनामी का वास्ता देकर घरवाले पुलिस के सामने मुंह खोलने से रोक देते हैं। ऐसा गारंटी के साथ तो नहीं कहा जा सकता है कि एफ.आई.आर. लिखवाने से ही महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगी, परंतु उन्हे समझना होगा यह समय अपने पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ स्वयं खड़े होने का है।इसके लिए सबसे पहले एफ.आई.आर दर्ज कराना आवश्यक है। महानगरों में अब धीरे -धीरे महिलाएं इंसाफ के लिए आगे आ रही हैं और कुछ मामलों में उन्हे इंसाफ 

मिला भी है।

इलाहाबाद के तीन बड़े थानों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार महीने में औसतन सौ मुकदमे दर्ज होते हैं जिसमें 5% से 7% महिलाएं होती हैं। गांव-देहात में  महिलाओं की भागीदारी 5% से अधिक नहीं है। एफ.आई.आर. लिखवाना बहुत कठिन काम नहीं हैं। इसके लिए आपको इसे दर्ज करवाने का सही तरीका और हौसले की  आवश्यकता है। एफ.आई.आर. यानी प्राथमिकी दर्ज करवाने के आसान तरीके पर नजर डालते हैं-

  • प्राथमिकी हमेशा लिखित में दर्ज करें। अंत में आपके हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए।
  • प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए आपको चश्मदीद गवाह ले जाने की जरूरत नहीं है। यदि आप अपराधी का नाम न जानती हों तो भी प्राथमिकी दर्ज करवा सकती हैं परंतु उसका हुलिया बताना आवश्यक है।
  • प्राथमिकी में दुर्घ्रटना की जगह,तारीख और समय जरूर लिखें। दुर्घटना की जानकारी सम्पूर्ण परंतु छोटी होनी चाहिए। अनावश्यक बातें लिखकर इस लंबा न करें क्येंकि अगर कुछ साल बाद अदालत में आपकी पेशी हुई तो अनावश्यक बातें आप भूल सकती हैं।
  • आप किसी भी पुलिस स्टेशन पर प्राथमिकी दर्ज करवा सकती हैं। यह पुलिस आफिसर की डयूटी है कि वह दुर्घटना के निकटतम पुलिस स्टेशन पर प्राथमिकी भेजे।
  • प्राथमिकी दर्ज करवाने में समय की कोई पाबंदी नहीं है लेकिन दुर्घटना के बाद आप जितनी जल्दी एफ.आई.आर दर्ज कराएंगी उतना ही अच्छा है।
  • पुलिस प्राथमिकी दर्ज करते समय वहां की स्थानीय भाषा का प्रयोग करती है अत: यदि आप वहां की स्थानीय भाषा ठीक से न जानती हों तो किसी लोकल व्यकित को साथ ले जाएं।
  • एफ.आई.आर. की एक कापी अपने पास अवश्य रखें और उस पर पुलिस के हस्ताक्षर और थाने की सील लगी हो।अपने पास ऐसी कापी न होने की सिथति में हो सकता है कि इस पर कोई कार्यवाई न हो और आप कुछ भी न कर पाएं।
  • अगर किसी कारणवश आप पुलिस स्टेशन न जा पाएं तो फोन पर भी पुलिस को दुर्घटना की जानकारी दे सकती हैं। ऐसी सिथति में आपका नाम ,आयु ,पता एवं फोन नम्बर की जानकारी पुलिस अपनी रिकार्ड के लिए लेती है।
  • अक्सर सुनने में आता है कि पुलिस ने एफ.आई.आर. लिखने से इंकार किया। परंतु यह गैर कानूनी है।अगर आपके साथ ऐसा होता है तो डरें नहीं इलाके के एस.पी अर्थात पुलिस अधीक्षक से शिकायत करें।


यदि आपके साथ कोई दुर्घटना घटती है तो छुपाएं नहीं इससे गुंडे-बदमाशों का हौसला बढ़ता है और कोई अन्य लड़की उनका शिकार बनती है। अत: एफ.आई.आर. दर्ज कराएं क्योंकि किसी भी अपराधी को सजा दिलवाने का पहली सीढ़ी है एफ.आई.आर. अर्थात फस्र्ट इनफारमेशन रिपोर्ट।एक जिम्मेदार शहरी और  नागरिक की भी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं जिनमें प्राथमिकी दर्ज करवाना भी शामिल है और महिलाएं भी जिम्मेदार शहरी हैं। है ना ?

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