Saturday, November 25, 2017
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समर वेकेशन प्रारंभ हो गया है। अभी बच्चे बहुत खुश हैं क्योंकि स्कूल बंद है लेकिन वह कुछ दिनों में ही बोर होने लगेंगे क्योंकि गर्मी के कारण आप बच्चों को दिन में घर से निकलने नहीं देंगे। एक विकल्प है टीवी पर कब तक। वह भी कुछ दिन बाद बोरिंग लगता है।

पुराने जमाने में वेकेशन का मतलब था ननिहाल जाना और दिन भर मस्ती करना।परंतु आज जमाना बदल गया है। प्रतियोगिता के दौर में अभिभावक बच्चे दोनो चाहते हैं वेकेशन को इस्तेमाल करना।

समर वेकेशन में भी करियर की चिंता 

वेकेशन में बच्चों को पढ़ाई का तनाव नहीं होना चाहिए पर आजकल ऐसा नहीं हो रहा है। जो बच्चे अपने करियर के बारे में सोचना सीख गये हैं वह वेकेशन को मस्ती में बर्बाद नहीं करना चाहते। वह इस समय भी भविष्य बनाने के लिए कुछ सीखना चाहते हैं।आज के दौर में यह सोच बिल्कुल सही है।लेकिन छुटटी को उपयोगी बनाने के साथ साथ तनाव मुक्त और खशहाल बनाना मां बाप की जिम्मेदारी है।

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आजकल हर शहर में जगह जगह पर समर क्लासेस हो रहे हैं। अपने बच्चों को वहां जाने से न रोकें । उन्हें अपना मन पसंद कोर्स करने दें। अगर आपके बस में हो तो बच्चों को अपने शहर के बाहर समर कैम्प में अवश्य भेजें। इससे बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं और लोगों से मिलने जुलने में हिचकते नहीं जो भविष्य में बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। परंतु भेजने से पहले कैम्प के बारे में पूरी जानकारी ले लें खासकर लड़की को भेजना हो तो पता करें कि वह जगह लड़की के लिए सही है या नहीं।

जिस बच्चे की उम्र अपने करियर के बारे में सोचने की नहीं है उसे भी समर क्लासेस में भेजें। माता पिता पहले गौर करें कि बच्चे की रूचि किस तरफ है और उसी के अनुसार समर क्लासेस के कोर्सेस का चयन करें। अगर आप अपनी पसंद के अनुसार समर क्लासेस में विषय का चयन करेंगे तो इस उम्र के बच्चे मान लेंगे लेकिन कुछ सीख नहीं पाएंगे। बच्चे की पसंद का ख्याल करें अपनी पसंद उन पर न थोपें। 

करियर के अलावा मस्ती भी जरूरी

वेकेशन के दौरान बच्चों का काफी समय घर पर बीतता है। मस्ती तो बच्चे करेंगे ही लेकिन उसमें अगर मम्मी पापा का साथ हो तो खुशी दोगुनी हो जाती है। कुछ बच्चे छुटिटयों में बाहर घूमने जाते हैं पर सभी बच्चों के मम्मी पापा के लिए उन्हें बाहर घुमाने ले जाना संभव नहीं हो पाता। एक तो बजट इजाजत नहीं देता दूसरे उनके भी छुटटी का सवाल। शहर के बाहर नहीं जा सकते तो शहर के अंदर ही आउटिंग के लिए समय समय पर जा सकते हैं।

घर में बच्चों के लिए इनडोर गेम्स की व्यवस्था करें जैसे लूडो ,कैरम, चेस , चाइनिज चेकर , लेकिसकन , सक्रैबल इत्यादि। आजकल ज्यादातर घरों में एक ही बच्चा होता है इसलिए अधिकतर बच्चे वीडियो गेम्स खेलते हैं।लेकिन ज्यादा वीडियो गेम्स खेलना बच्चे की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। दूसरे इनडोर गेम्स बच्चे अकेले नहीं खेल सकते इसलिए मम्मी पापा को टाईम निकालकर उसके साथ खेलना पड़ेगा।ऐसा करके देखिए आपके बच्चे की खुशी कितनी बढ़ जाएगी।

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आजकल एकल परिवार का चलन है ऐसे में बच्चों की छुटिटयों को कलरफुल बनाने के लिए मम्मी पापा को सकि्रय भूमिका निभानी पड़ती है। बच्चे को अगर आप बाहर नहीं ले जा सकते और उसे पूरा टाईम भी नहीं दे सकते तो दादा - दादी या नाना - नानी को बुला लें। बच्चे बहुत खुश रहेंगे। दादा - दादी या नाना - नानी नाती पोतों को कहानियां सुनाना पसंद करते हैं। इन कहानियों के जरिये बच्चों में संस्कार पैदा होते हैं। इतिहास की बातें सीखते हैं , महापुरूषों की जीवनी सुनते हैं। यही सब स्कूल की किताबों से सीखना बच्चों को बोझ लगता है और ऐसे में तो खेल खेल में ही सीख जाते हैं। अपने परिवार और पूवर्जों के बारे में जान सकते हैं जो बहुत जरूरी है। बच्चों को मम्मी पापा के बचपन की कहानी सुनने में बहुत दिलचस्पी होती है। दादा- दादी , नाना - नानी से बच्चे यह सुन सकते हैं।अगर दादा- दादी या नाना - नानी न हों तो मम्मी पापा को ही यह काम भी करना पड़ेगा। अच्छी कहानियों के साथ साथ अपने बचपन की कहानियां भी बच्चों को सुनाएं लेकिन कभी उनसे न कहें कि देखो मैं कितना अच्छा था तुम्हे भी ऐसा ही बनना है। बचपन में सभी शैतानी करते हैं आप भी किये होंगे उसे न छुपाइए बच्चों से खुलकर कहिए। इसी से तो बच्चे सच कहना सीखेंगे। बहुत मम्मी पापा सोचते हैं कि दादा - दादी , नाना -नानी की सेाहबत में बच्चे बिगड़ जाते हैं। पर आजकल के गै्रड पेरेंटस ऐसे नहीं होते और अगर उनसे बच्चों को थोड़ा ज्यादा प्यार मिले तो यह बच्चों का हक है जो बड़े होने पर उनके मन में मीठी याद बनकर रह जाती है।

बच्चों को होम मैनेजमेंट सिखाएं 

छुटटी में केवल मस्ती नहीं खेल खेल में बच्चों को घर का काम भी सिखाएं क्योंकि लड़का हो या लड़की आजकल उच्च शिक्षा के लिए उन्हें घर से दूर अकेले रहना पड़ता है।

वेकेशन के दौरान बच्चों से घर का काम करवाएं जैसे घर को साफ और व्यवसिथत करना , घर को सजाना , पढ़ने का कमरा ठीक करना , अपना कपड़ा खुद साफ करना आजकल वाशिंग मशीन के सहारे कपड़ा छोटा बच्चा भी धो सकता है पर ध्यान रहे यह काम बड़ों की निगरानी में होना चाहिए ताकि कोई हादसा न हो।

बच्चों को पौधों में पानी देने का काम सौंपे।उन्हें फूलों का नाम सिखाएं। इससे वह प्रकृति के संपर्क में आएंगे।

उम्र के हिसाब से बच्चों से थोड़ा बहुत कुकिंग भी करवाएं। हल्का नाश्ता ,चाय ,काफी , सैंडविच , सलाद , फ्रूटचाट इत्यादि बनाना। थोड़ा बड़ा होने पर मैगी , नूडल्स , पोहा , उपमा , आमलेट ,अंडा उबालना सिखा दें। यदि आप वेकेशन में कुकिंग सिखाएंगे तो बच्चे खेल खेल में सीख जाएंगे। यह उन्हे आत्मनिर्भर बनाएगा जो भविष्य में उनके बहुत काम आएगा।

बच्चों के फ़्रेंड्स को कभी कभी पार्टी के लिए घर पर बुलाएं जिसको मैनेज करने का काम बच्चों से ही करवाएं। आप बच्चे के साथ अवश्य रहें और उसकी मदद करें। अपने लाडले या लाडली के बेस्ट फ्रेंड को डे स्पेंड करने के लिए घर पर बुलाएं। अगर आपके बच्चे का कोई फ्रेंड अपने घर पर उसे बुलाए तो जाने दें।

छुटटी पर बच्चे घर पर रहेंगे तो उन्हें ज्यादा भूख लगेगी ही और वह चटपटा खाना ही पसंद करते हैं। लेकिन गर्मी में बाजार का खाना सेहत के लिए ठीक नहीं इसलिए अगर आप घर में ही पोटैटो चिप्स , कुछ नमकीन , केक , टी बन , दालमोठ बना कर रखें। इन सबके साथ ही बच्चे इस मौसम में ठंडा खाना चाहते हैं। उनके लिए मैंगो शेक , तरबूज का शर्बत , लस्सी , मिल्क शेक , जीरा जल आदि बनाकर फि्रज में ठंडा करके रखें तो बच्चे कोल्ड डि्रंक भूलकर यही पीएंगे।बर्फ का गोला खाना बच्चों को बहुत अच्छा लगता है। पर सड़क पर जो बर्फ का गोला बिकता है वह खाना ठीक नहीं। घर के बर्फ को क्रश करें। आइस्रीम सेट में क्रश बर्फ डालकर उपर से बच्चों के पसंद का सिरप डालें और बच्चों को दें।साथ में खुद भी खाएं इससे बच्चे और भी खश हो जाएंगे। आइसक्रीम और कुल्फी बच्चों की पसंद की तालिका में सबसे उपर रहता है। इस बढ़ती महंगाई के जमाने में बाजार का आइसक्रीम या कुल्फी रोज खाना संभव नहीं है तो बच्चों को डांटने के बजाए घर में ही आइसक्रीम या कुल्फी बनाइए। आइसक्रम सर्व करने के लिए स्कूप ले लीजिए और स्कूप से गोला जैसा आइसक्रीम निकालकर उपर से फेंटा हुआ ठंडा क्रीम डालकर चेरी या अन्य फलों के छोटे छोटे टुकड़े से सजाकर बच्चों को दीजिए वह दुकान की आइसक्रीम भूल जाएंगे।

बच्चों की छुटटी तो हर संडे होती है। उनकी इन छुटिटयों से समर वेकेशन को अलग बनाएं जो कि हमेशा बच्चों को हमेशा याद रहे। तो आपके सामने बच्चों के समर वेकेशन को यादगार और उपयोगी बनाने के बहुत से आप्शंस हैं। इसमें से अपने और बच्चे के पसंद का आइडिया ट्राई करें वेकेशन कब बीत जाएगा मालूम ही नहीं पड़ेगा।परंतु बच्चे का वेकेशन तभी कलरफुल होगा जब मम्मी पापा इस समय को बच्चों के नाम लिख दें।

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