Thursday, November 23, 2017
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इलाहाबाद। बीते दिनों आई आईआईटी में सात दिवसीय विज्ञान समागम के दौरान देश विदेश के अनेक वैज्ञानिकों के साथ-साथ अनेक नोबल पुरस्कार विजेता भी आए। उन्होंने अपने अनुभवों को युवा वैज्ञानिकों के साथ साझा किया। इस दौरान विज्ञान के अनेक शोधों के बारे में जानकारी मिली तथा युवा वैज्ञानिकों की जिज्ञासाओं का समाधान आए हुए वैज्ञानिकों ने किया। यह विज्ञान समागम 8 दिसंबर से 14 दिसंबर तक चला। कार्यक्रम का उदघाटन नोबेल वैज्ञानिक प्रोफेसर राबर्ट एफ कर्ल, टि्रपल आईटी के कुलपति पदमश्री प्रोफेसर गोवर्धन मेहता और पदम विभूषण प्रोफेसर जे वी नार्लीकर ने किया। 
 
मेहनत के साथ भाग्य का होना भी जरूरी : प्रोफेसर कर्ल
दो अन्य वैज्ञानिकों के साथ कार्बन 60 की खोज करने वाले प्रोफेसर कर्ल एक औसत दर्जे के छात्र थे परंतु कड़ी मेहनत से ही उनकी पढ़ाई आसान होती चली गई। प्रो कर्ल का कहना था कि नोबल से भी बड़े आज कई पुरस्कार हैं लेकिन इसको इतना नाम इसलिए मिला क्योंकि यह तब शुरू हुआ जब नई खोज शुरू हुई। उनका कहना है कि मेहनत के साथ-साथ भाग्य को होना भी जरूरी है क्योंकि कई वैज्ञानिक सैकड़ों रिसर्च करने के बाद भी उतने मशहूर नहीं हुए जितने की कुछ वैज्ञानिक एक दो रिसर्च में ही हो गए। 
 
भारत को भौतिकी में मिल सकता है नोबेल : प्रोफेसर क्लाज वान किलटजिंग 
अपने टि्रपल आईटी प्रवास के दौरान प्रोफेसर क्लाज वान किलटजिंग ने कहा कि भारत के भौतिकविद रिसर्च के क्षेत्र में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। निकट भविष्य में यह भी संभावना है कि भौतिक क्षेत्र का नोबेल कोई भारतीय ही ले जाएगा। युवा वैज्ञानिकों को नोबेल के लिए प्रेरित करने के लिए उन्होंने अपनी जेब से नोबेल मेडल निकालकर छात्रों को दिखाया तथा कहा कि कठिन परिश्रम और पूरी लगन के साथ काम करके इसको हासिल किया जा सकता है।
 
विज्ञान के क्षेत्र में अपार संभावनाएं 
प्रोफेसर इरविन नेहर ने छात्रों को बायो इलेकिट्रसिटी के जन्मदाता इटली के वैज्ञानिक ल्यूगी गलवानी के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों को मानव मषितष्क में मेमरेन की भूमिका तथा इसके विकास के विषय में जानकारी दी। उन्होंने आगे कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
प्रोफेसर नेहर नोबेल पुरस्कार का श्रेय अपनी पत्नी इवा मारिया को देते हैं जो कि स्वयं एक वैज्ञानिक थी परंतु पति और पांच बच्चों के देखरेख के लिए गृहणी बन कर रही गर्इ। प्रोफेसर नेहर फिजिक्स और मैथ्स में ज्यादा रुचि रखते थे। उनका कहना है कि शिक्षक शिक्षा देने के अलावा व्यकितगत मामलों में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
 
विज्ञान को सीमाओ में नहीं बांधा जा सकता: प्रोफेसर जोहान डीजेन होफर 
एक किसान परिवार में जन्में नोबेल वैज्ञानिक प्रोफेसर जोहान डीजेन होफर ने कहा कि विज्ञान को किसी भी तरह के सीमा में नहीं बांधा जा सकता। एक व्यकित गांव से भी पढ़कर आगे बढ़ सकता है तथा असीम सफलता प्राप्त कर सकता है। प्रोफेसर होफर सर अलबर्ट आइंसटीन को अपना आदर्श मानते हैं तथा उन्ही के गांव के रहने वाले हैं।
 
युवा वैज्ञानिकों को सिविल सेवा में जाना विज्ञान के लिए ठीक नहीं
उच्च शिक्षा और शोध में सुधार पर परिचर्चा के दौरान वैज्ञानिकों ने कहा कि बीटेक एमटेक और एमबीबीएस करने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं को सिविल सेवाओं में जाना ठीक नही है। वैज्ञानिकों ने माना कि इसकेपीछे मुख्य वजह नौकरशाही की तुलना में वैज्ञानिक बनने में ग्लैमर का अभाव है। विज्ञान में महिलाओं की सिथति विषय पर प्रेक्षागृह में परिचर्चा में नोबेल वैज्ञानिकों की पतिनयां शामिल हुर्इं। इवा नेहर ने कहा कि 1901 से अब तक 511 वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार मिला है जिनमें महिलाएं मात्र 3 प्रतिशत हैं। महिलाओं को इस क्षेत्र में भी अपनी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
सातवें दिन का मुख्य आकर्षण 1988 में रसायन में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर वाल्टर कोहन की मौजूदगी रही। उन्होंने सेमी कंडक्टर के बारे में जानकारी दी। इस दौरान अनेक रंगारंग कार्यक्रम भी हुए। जिसमें मुख्य आकर्षण अभिनेत्री ग्रेसी सिंह का बैले डांस रहा। 

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