Tuesday, November 21, 2017
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इलाहाबाद। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने चोटी के 200 विश्वविधालयों में देश का एक भी संस्थान न होने पर चिंता जाहिर की। मंगलवार को एमएनआईटी के नौवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारकर हमें शीर्ष के दस या पचास संस्थानों में अपना स्थान बनाना होगा।

 

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 2006-07 में उच्च शिक्षा के छात्रों की संख्या 1.39 करोड़ थी जो वर्तमान में 18 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.18 करोड़ हो गई है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है और अनुमान है कि वर्ष 2016-17 तक इसमें 25 प्रतिशत तक वृद्धि होगी। देश में तकनीकि संस्थान और विश्वविधालयों को बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा के लिए स्कालरशिप, एजूकेशन लोन और कमाई के साथ पढ़ाई जैसी योजनाओं के विस्तार की बात कही। उन्होंने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के माध्यम को बढ़ाने की बात कही।

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शोध की सिथति पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल स्नातक में 260 लाख छात्र थे लेकिन पीएचडी छात्रों की संख्या मात्र एक लाख थी। 2010 में भारत ने पेटेंट के लिए सिर्फ 6 हजार आवेदन भेजे जबकि चीन ने छह लाख, जर्मनी ने 1.7 लाख, जापान ने 4.64 लाख और अमेरिका ने 4.2 लाख आवेदन किए थे। आंकड़े बताते हैं कि हम शोध के क्षेत्र में बाकी देशों से कितना पीछे हैं। राष्ट्रपति ने शिक्षा में छात्राओं की घटती संख्यापर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना का जिक्र करते हुए उन्होनें कहा कि इसमें उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए काफी उपाय किए जा रहे हैं।

इससे पूर्व उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी.एल. जोशी एवं एमएनएनआईटी के प्रशासकीय परिषद के अध्यक्ष वी. के. सारस्वत ने भी समारोह को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने बीटेक के छात्र आलोक अग्रवाल को गोल्ड मेडल प्रदान किया। इसके साथ ही शोभित श्रीवास्तव, निशंक गुप्ता, पाखी अग्रवाल को भी राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल मिला।

महिलाओं का सम्मान करें

दिल्ली में बलात्कार की घटना पर भावुक होते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मैं यहां एक क्षण उस युवा बहादुर छात्रा के लिए लूंगा जो हाल ही में दिल्ली में क्रूर हिंसा की शिकार हुई है। सरकार सिथति से वाकिफ है और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं जिससे भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृतित न हो। मैं उस छात्रा के जल्द स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करता हूं। उन्होंने कहा कि समाज के हर शख्स को महिलाओं का सम्मान करना होगा तभी इस तरह की घटना को रोका जा सकता है।

1177 छात्रों को मिले मेडल

राष्ट्रपति के संक्षिप्त कार्यक्रम के कारण कार्यक्रम को दो सत्रों में पूरा किया गया। पहले सत्र में राष्ट्रपति द्वारा चार मेधावी विधार्थियों को मेडल दिया गया। बाद में निदेशक प्रोफेसर पी चक्रवर्ती ने डिग्री प्रदान की। इनमें 619 बीटेक, 375 एमटेक, 63 एमबीए, 66 एमसीए 10 एमएसडब्लू और 10 एमएससी के विधार्थी थे। इसके अलावा 34 विधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। समारोह में स्नातक के 13 और परास्नातक के 25 विधार्थियों को गोल्ड मेडल दिया गया।

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